विषयानुक्रमणिका
- 1. शान्तिपर्व
- 1.0.1. अध्यायः 001
- 1.0.2. अध्यायः 002
- 1.0.3. अध्यायः 003
- 1.0.4. अध्यायः 004
- 1.0.5. अध्यायः 005
- 1.0.6. अध्यायः 006
- 1.0.7. अध्यायः 007
- 1.0.8. अध्यायः 008
- 1.0.9. अध्यायः 009
- 1.0.10. अध्यायः 010
- 1.0.11. अध्यायः 011
- 1.0.12. अध्यायः 012
- 1.0.13. अध्यायः 013
- 1.0.14. अध्यायः 014
- 1.0.15. अध्यायः 015
- 1.0.16. अध्यायः 016
- 1.0.17. अध्यायः 017
- 1.0.18. अध्यायः 018
- 1.0.19. अध्यायः 019
- 1.0.20. अध्यायः 020
- 1.0.21. अध्यायः 021
- 1.0.22. अध्यायः 022
- 1.0.23. अध्यायः 023
- 1.0.24. अध्यायः 024
- 1.0.25. अध्यायः 025
- 1.0.26. अध्यायः 026
- 1.0.27. अध्यायः 027
- 1.0.28. अध्यायः 028
- 1.0.29. अध्यायः 029
- 1.0.30. अध्यायः 030
- 1.0.31. अध्यायः 031
- 1.0.32. अध्यायः 032
- 1.0.33. अध्यायः 033
- 1.0.34. अध्यायः 034
- 1.0.35. अध्यायः 035
- 1.0.36. अध्यायः 036
- 1.0.37. अध्यायः 037
- 1.0.38. अध्यायः 038
- 1.0.39. कृष्णादिभिर्युधिष्ठिरस्य राज्येऽभिषेचनम्॥ 1॥
- 1.0.40. अध्यायः 040
- 1.0.41. अध्यायः 041
- 1.0.42. अध्यायः 042
- 1.0.43. अध्यायः 043
- 1.0.44. अध्यायः 044
- 1.0.45. अध्यायः 045
- 1.0.46. अध्यायः 046
- 1.0.47. अध्यायः 047
- 1.0.48. अध्यायः 048
- 1.0.49. अध्यायः 049
- 1.0.50. अध्यायः 050
- 1.0.51. अध्यायः 051
- 1.0.52. अध्यायः 052
- 1.0.53. अध्यायः 053
- 1.0.54. अध्यायः 054
- 1.0.55. अध्यायः 055
- 1.0.56. अध्यायः 056
- 1.0.57. अध्यायः 057
- 1.0.58. अध्यायः 058
- 1.0.59. अध्यायः 059
- 1.0.60. अध्यायः 060
- 1.0.61. अध्यायः 061
- 1.0.62. अध्यायः 062
- 1.0.63. अध्यायः 063
- 1.0.64. अध्यायः 064
- 1.0.65. अध्यायः 065
- 1.0.66. अध्यायः 066
- 1.0.67. अध्यायः 067
- 1.0.68. अध्यायः 068
- 1.0.69. अध्यायः 069
- 1.0.70. अध्यायः 070
- 1.0.71. अध्यायः 071
- 1.0.72. अध्यायः 072
- 1.0.73. अध्यायः 073
- 1.0.74. अध्यायः 074
- 1.0.75. अध्यायः 075
- 1.0.76. अध्यायः 076
- 1.0.77. अध्यायः 077
- 1.0.78. अध्यायः 078
- 1.0.79. अध्यायः 079
- 1.0.80. अध्यायः 080
- 1.0.81. अध्यायः 081
- 1.0.82. अध्यायः 082
- 1.0.83. अध्यायः 083
- 1.0.84. अध्यायः 084
- 1.0.85. अध्यायः 085
- 1.0.86. अध्यायः 086
- 1.0.87. अध्यायः 087
- 1.0.88. अध्यायः 088
- 1.0.89. अध्यायः 089
- 1.0.90. अध्यायः 090
- 1.0.91. अध्यायः 091
- 1.0.92. अध्यायः 092
- 1.0.93. अध्यायः 093
- 1.0.94. अध्यायः 094
- 1.0.95. अध्यायः 095
- 1.0.96. अध्यायः 096
- 1.0.97. अध्यायः 097
- 1.0.98. अध्यायः 098
- 1.0.99. अध्यायः 099
- 1.0.100. अध्यायः 100
- 1.0.101. अध्यायः 101
- 1.0.102. अध्यायः 102
- 1.0.103. अध्यायः 103
- 1.0.104. अध्यायः 104
- 1.0.105. अध्यायः 105
- 1.0.106. अध्यायः 106
- 1.0.107. अध्यायः 107
- 1.0.108. अध्यायः 108
- 1.0.109. अध्यायः 109
- 1.0.110. अध्यायः 110
- 1.0.111. अध्यायः 111
- 1.0.112. अध्यायः 112
- 1.0.113. अध्यायः 113
- 1.0.114. अध्यायः 114
- 1.0.115. अध्यायः 115
- 1.0.116. अध्यायः 116
- 1.0.117. अध्यायः 117
- 1.0.118. अध्यायः 118
- 1.0.119. अध्यायः 119
- 1.0.120. अध्यायः 120
- 1.0.121. अध्यायः 121
- 1.0.122. अध्यायः 122
- 1.0.123. अध्यायः 123
- 1.0.124. अध्यायः 124
- 1.0.125. अध्यायः 125
- 1.0.126. अध्यायः 126
- 1.0.127. अध्यायः 127
- 1.0.128. अध्यायः 128
- 1.0.129. अध्यायः 129
- 1.0.130. अध्यायः 130
- 1.0.131. अध्यायः 131
- 1.0.132. अध्यायः 132
- 1.0.133. अध्यायः 133
- 1.0.134. अध्यायः 134
- 1.0.135. अध्यायः 135
- 1.0.136. अध्यायः 136
- 1.0.137. अध्यायः 137
- 1.0.138. अध्यायः 138
- 1.0.139. अध्यायः 139
- 1.0.140. अध्यायः 140
- 1.0.141. अध्यायः 141
- 1.0.142. अध्यायः 142
- 1.0.143. अध्यायः 143
- 1.0.144. अध्यायः 144
- 1.0.145. अध्यायः 145
- 1.0.146. अध्यायः 146
- 1.0.147. अध्यायः 147
- 1.0.148. व्याधेन विमानस्थयोर्दर्शनम्॥ 1॥ ततो व्याधेन दावाग्नौ शरीरत्यागेन स्वर्गगमनम्॥ 2॥
- 1.0.149. अध्यायः 149
- 1.0.150. अध्यायः 150
- 1.0.151. अध्यायः 151
- 1.0.152. अध्यायः 152
- 1.0.153. अध्यायः 153
- 1.0.154. अध्यायः 154
- 1.0.155. अध्यायः 155
- 1.0.156. अध्यायः 156
- 1.0.157. अध्यायः 157
- 1.0.158. अध्यायः 158
- 1.0.159. अध्यायः 159
- 1.0.160. अध्यायः 160
- 1.0.161. अध्यायः 161
- 1.0.162. अध्यायः 162
- 1.0.163. अध्यायः 163
- 1.0.164. अध्यायः 164
- 1.0.165. अध्यायः 166
- 1.0.166. अध्यायः 167
- 1.0.167. अध्यायः 168
- 1.0.168. अध्यायः 169
- 1.0.169. अध्यायः 170
- 1.0.170. अध्यायः 171
- 1.0.171. अध्यायः 172
- 1.0.172. अध्यायः 173
- 1.0.173. अध्यायः 174
- 1.0.174. अध्यायः 175
- 1.0.175. अध्यायः 176
- 1.0.176. अध्यायः 177
- 1.0.177. अध्यायः 178
- 1.0.178. अध्यायः 180
- 1.0.179. अध्यायः 181
- 1.0.180. अध्यायः 182
- 1.0.181. अध्यायः 183
- 1.0.182. अध्यायः 184
- 1.0.183. अध्यायः 185
- 1.0.184. अध्यायः 186
- 1.0.185. अध्यायः 187
- 1.0.186. अध्यायः 188
- 1.0.187. अध्यायः 189
- 1.0.188. अध्यायः 190
- 1.0.189. अध्यायः 191
- 1.0.190. अध्यायः 192
- 1.0.191. अध्यायः 193
- 1.0.192. अध्यायः 194
- 1.0.193. अध्यायः 195
- 1.0.194. अध्यायः 196
- 1.0.195. अध्यायः 197
- 1.0.196. अध्यायः 198
- 1.0.197. अध्यायः 199
- 1.0.198. अध्यायः 200
- 1.0.199. अध्यायः 201
- 1.0.200. अध्यायः 202
- 1.0.201. अध्यायः 203
- 1.0.202. अध्यायः 204
- 1.0.203. अध्यायः 205
- 1.0.204. अध्यायः 206
- 1.0.205. अध्यायः 207
- 1.0.206. अध्यायः 208
- 1.0.207. अध्यायः 209
- 1.0.208. अध्यायः 210
- 1.0.209. अध्यायः 211
- 1.0.210. अध्यायः 212
- 1.0.211. अध्यायः 213
- 1.0.212. अध्यायः 214
- 1.0.213. अध्यायः 215
- 1.0.214. अध्यायः 216
- 1.0.215. अध्यायः 217
- 1.0.216. अध्यायः 218
- 1.0.217. अध्यायः 219
- 1.0.218. अध्यायः 220
- 1.0.219. अध्यायः 221
- 1.0.220. अध्यायः 222
- 1.0.221. अध्यायः 223
- 1.0.222. अध्यायः 224
- 1.0.223. अध्यायः 225
- 1.0.224. अध्यायः 226
- 1.0.225. अध्यायः 227
- 1.0.226. अध्यायः 228
- 1.0.227. अध्यायः 229
- 1.0.228. अध्यायः 230
- 1.0.229. अध्यायः 231
- 1.0.230. अध्यायः 232
- 1.0.231. अध्यायः 233
- 1.0.232. अध्यायः 234
- 1.0.233. अध्यायः 235
- 1.0.234. अध्यायः 236
- 1.0.235. अध्यायः 237
- 1.0.236. अध्यायः 238
- 1.0.237. अध्यायः 239
- 1.0.238. अध्यायः 240
- 1.0.239. अध्यायः 241
- 1.0.240. अध्यायः 242
- 1.0.241. अध्यायः 243
- 1.0.242. अध्यायः 244
- 1.0.243. अध्यायः 245
- 1.0.244. अध्यायः 246
- 1.0.245. अध्यायः 247
- 1.0.246. अध्यायः 248
- 1.0.247. अध्यायः 249
- 1.0.248. अध्यायः 250
- 1.0.249. अध्यायः 251
- 1.0.250. अध्यायः 252
- 1.0.251. अध्यायः 253
- 1.0.252. अध्यायः 254
- 1.0.253. भीष्मेण युधिष्ठिरम् प्रति ज्ञानादिप्रशंसापरव्यासवाक्यानुवादः॥ 1॥
- 1.0.254. अध्यायः 256
- 1.0.255. अध्यायः 257
- 1.0.256. अध्यायः 258
- 1.0.257. अध्यायः 259
- 1.0.258. अध्यायः 260
- 1.0.259. अध्यायः 261
- 1.0.260. अध्यायः 262
- 1.0.261. अध्यायः 263
- 1.0.262. अध्यायः 264
- 1.0.263. अध्यायः 265
- 1.0.264. अध्यायः 266
- 1.0.265. अध्यायः 267
- 1.0.266. अध्यायः 268
- 1.0.267. अध्यायः 269
- 1.0.268. अध्यायः 270
- 1.0.269. अध्यायः 271
- 1.0.270. अध्यायः 272
- 1.0.271. अध्यायः 273
- 1.0.272. अध्यायः 274
- 1.0.273. अध्यायः 275
- 1.0.274. अध्यायः 276
- 1.0.275. अध्यायः 277
- 1.0.276. अध्यायः 278
- 1.0.277. अध्यायः 279
- 1.0.278. अध्यायः 280
- 1.0.279. अध्यायः 281
- 1.0.280. अध्यायः 282
- 1.0.281. अध्यायः 283
- 1.0.282. अध्यायः 284
- 1.0.283. अध्यायः 285
- 1.0.284. अध्यायः 286
- 1.0.285. अध्यायः 287
- 1.0.286. अध्यायः 288
- 1.0.287. अध्यायः 289
- 1.0.288. अध्यायः 290
- 1.0.289. अध्यायः 291
- 1.0.290. अध्यायः 292
- 1.0.291. अध्यायः 293
- 1.0.292. अध्यायः 294
- 1.0.293. अध्यायः 295
- 1.0.294. अध्यायः 296
- 1.0.295. अध्यायः 297
- 1.0.296. अध्यायः 298
- 1.0.297. अध्यायः 299
- 1.0.298. अध्यायः 300
- 1.0.299. अध्यायः 301
- 1.0.300. अध्यायः 302
- 1.0.301. अध्यायः 303
- 1.0.302. अध्यायः 304
- 1.0.303. अध्यायः 305
- 1.0.304. अध्यायः 306
- 1.0.305. अध्यायः 307
- 1.0.306. अध्यायः 308
- 1.0.307. अध्यायः 309
- 1.0.308. अध्यायः 310
- 1.0.309. अध्यायः 311
- 1.0.310. अध्यायः 312
- 1.0.311. अध्यायः 313
- 1.0.312. अध्यायः 314
- 1.0.313. अध्यायः 315
- 1.0.314. अध्यायः 316
- 1.0.315. अध्यायः 317
- 1.0.316. अध्यायः 318
- 1.0.317. अध्यायः 319
- 1.0.318. अध्यायः 320
- 1.0.319. अध्यायः 321
- 1.0.320. अध्यायः 322
- 1.0.321. अध्यायः 323
- 1.0.322. अध्यायः 324
- 1.0.323. अध्यायः 325
- 1.0.324. अध्यायः 326
- 1.0.325. अध्यायः 327
- 1.0.326. अध्यायः 328
- 1.0.327. अध्यायः 329
- 1.0.328. अध्यायः 330
- 1.0.329. अध्यायः 331
- 1.0.330. अध्यायः 332
- 1.0.331. अध्यायः 333
- 1.0.332. अध्यायः 334
- 1.0.333. अध्यायः 335
- 1.0.334. अध्यायः 336
- 1.0.335. अध्यायः 337
- 1.0.336. अध्यायः 338
- 1.0.337. अध्यायः 339
- 1.0.338. अध्यायः 340
- 1.0.339. अध्यायः 341
- 1.0.340. अध्यायः 342
- 1.0.341. अध्यायः 343
- 1.0.342. अध्यायः 344
- 1.0.343. अध्यायः 345
- 1.0.344. अध्यायः 346
- 1.0.345. अध्यायः 347
- 1.0.346. अध्यायः 348
- 1.0.347. अध्यायः 349
- 1.0.348. अध्यायः 350
- 1.0.349. अध्यायः 351
- 1.0.350. अध्यायः 352
- 1.0.351. अध्यायः 353
- 1.0.352. अध्यायः 354
- 1.0.353. अध्यायः 355
- 1.0.354. अध्यायः 356
- 1.0.355. अध्यायः 357
- 1.0.356. अध्यायः 358
- 1.0.357. अध्यायः 359
- 1.0.358. अध्यायः 360
- 1.0.359. अध्यायः 361
- 1.0.360. अध्यायः 362
- 1.0.361. अध्यायः 363
- 1.0.362. अध्यायः 364
- 1.0.363. अध्यायः 365
- 1.0.364. अध्यायः 366
- 1.0.365. अध्यायः 367
- 1.0.366. अध्यायः 368
- 1.0.367. अध्यायः 369
- 1.0.368. अध्यायः 370
- 1.0.369. अध्यायः 371
- 1.0.370. अध्यायः 372
- 1.0.371. अध्यायः 373
- 1.0.372. अध्यायः 374
- 1.0.373. अध्यायः 375
शान्तिपर्व
अध्यायः 001
गङ्गातीरे बन्धूनां कृतोदकं युधिष्ठिरम् प्रति व्यासनारदादिमहर्षीणां समागमनम्॥ 1॥ युधिष्ठिरेण तत्र नारदम् प्रति कर्णवृत्तान्तकथनप्रार्थना॥ 2॥
श्रीवेदव्यासाय नमः
नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्।
देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत्॥
वैशम्पायन उवाच
कृत्वोदकं ते सुहृदां सर्वेषां पाण्डुनन्दनाः।
विदुरो धृतराष्ट्रश्च सर्वाश्च भरतस्त्रियः॥
तत्र ते सुमहात्मानो न्यवसन्कुरुनन्दनाः।
शौचं निर्वर्तयिष्यन्तो मासमात्रं बहिः पुरात्॥
कृतोदकं तु राजानं धर्मात्मानं युधिष्ठिरम्।
अभिजग्मुर्महात्मानः सिद्धा ब्रह्मर्षिसत्तमाः॥
द्वैपायनो नारदश्च देवलश्च महानृषिः।
देवस्थानश्च कण्वश्च तेषां शिष्याश्च सत्तमाः॥
अन्ये च वेदविद्वांसः कृतप्रज्ञा द्विजातयः।
गृहस्थाः स्नातकाः सन्तो ददृशुः कुरुसत्तमम्॥
तेऽभिगम्य महात्मानं पूजिताश्च यथाविधि।
आसनेषु महार्हेषु विविशुः परमर्षयः॥
प्रतिगृह्य ततः पूजां तत्कालसदृशीं तदा।
पर्युपांसन्यथान्यायं परिवार्य युधिष्ठिरम्॥
पुण्ये भागीरथीतीरे शोकव्याकुलचेतसम्।
आश्वासयन्तो राजेन्द्रं विप्राः शतसहस्रशः॥
नारदस्त्वब्रवीत्काले धर्मपुत्रं युधिष्ठिरम्।
सम्भाष्य मुनिभिः सार्धं कृष्णद्वैपायनादिभिः॥
नारद उवाच
पार्थस्य बाहुवीर्येण प्रसादान्माधवस्य च।
जिता सेयं मही कृत्स्ना धर्मेण च युधिष्ठिर॥
दिष्ट्या मुक्ताः स्थ सङ्ग्रामादस्माल्लोकभयङ्करात्।
क्षत्रधर्मरतश्चासि कच्चिन्मोदसि पाण्डव॥
कच्चिच्च निहतामित्रः प्रीणासि सुहृदो नृप।
कच्चिच्छ्रियमिमां प्राप्य न त्वां शोकः प्रबाधते॥
युधिष्ठिर उवाच
विजितेयं मही कृत्स्ना कृष्णबाहुबलाश्रयात्।
ब्राह्मणानां प्रसादेन भीमार्जुनबलेन च॥
इदं तु मे महद्दुःखं वर्तते हृदि नित्यदा।
कृत्वा ज्ञातिक्षयमिमं महान्तं घोरदर्शनम्॥
सौभद्रं द्रौपदेयांश्च घातयित्वा सुतान्प्रियान्।
जयोऽयमजयाकारो भगवन्प्रतिभाति मे॥
किन्नु वक्ष्यति वार्ष्णेयी वधूर्मे मधुसूदनम्।
द्वारकावासिनी कृष्णमितः प्रतिगतं हरिम्॥
द्रौपदी हतपुत्रेयं कृपणा हतबान्धवा।
अस्मत्प्रियहिते युक्ता भूयः पीडयतीव माम्॥
इदमन्यच्च भगवन्यत्त्वां वक्ष्यामि नारद।
मन्त्रसंवरणेनास्मि कुन्त्या दुःखेन योजितः॥
यः स नागायुतप्राणो लोकेऽप्रतिरथो रणे।
सिंहविक्रान्तगामी च जितकाशी यतव्रतः॥
आश्रयो धार्तराष्ट्राणां मानी तीक्ष्णपराक्रमः।
अमर्षी नित्यसंरम्भी क्षेप्ताऽस्माकं रणेरणे॥
शीघ्रास्त्रश्चित्रयोधी च कृती चाद्भुतविक्रमः।
गूढोत्पन्नः सुतः कुन्त्या भ्राताऽस्माकमसौ किल ||
तोयकर्मणि तं कुन्ती कथयामास मे तदा।
पुत्रं सर्वगुणोयेतं कर्णं त्यक्तं जले पुरा॥
मञ्जूषायां समाधाय गङ्गास्रोतस्यमज्जयत्।
यं सूतपुत्रं लोकोऽयं राधेयं चाभ्यमन्यत॥
स सूर्यपुत्रः कुन्त्या वै भ्राताऽस्माकं च मातृतः।
अजानता मया सङ्ख्ये राज्यलुब्धेन घातितः।
तन्मे दहति गात्राणि तूलराशिमिवानलः॥
न हि तं वेद पार्थोऽपि भ्रातरं श्वेतवाहनः।
नाहं न भीमो न यमौ स त्वस्मान्वेद तत्वतः॥
गता किल पृथा तस्य सकाशमिति नः श्रुतम्।
अस्माकं शमकामा वै त्वं च पुत्रो ममेत्यथ॥
पृथाया न कृतः कामस्तेन चापि महात्मना।
अतीवानुचितं मातरवोच इति सोऽब्रवीत्॥
न हि शक्ष्यामि सन्त्यक्तुमहं दुर्योधनं रणे।
अनार्यत्वं नृशंसत्वं कृतघ्नत्वं च मे भवेत्॥
युधिष्ठिरेण सन्धिं हि यदि कुर्यां मते तव।
भीतो रणे श्वेतवाहादिति मां मंस्यते जनः॥
सोऽहं निर्जित्य समरे विजयं सहकेशवम्।
सन्धास्ये धर्मपुत्रेण पश्चादिति च सोऽब्रवीत्॥
तमवोचत्किल पृथा पुनः पृथुलवक्षसम्।
चतुर्णामभयं देहि कामं युध्यस्व फल्गुनम्॥
सोऽब्रवीन्मातरं धीमान्वेपमानां कृताञ्जलिः।
प्राप्तान्विषह्यांश्चतुरो न हनिष्यामि ते सुतान्॥
पञ्चैव हि सुता देवि भविष्यन्ति तव ध्रुवाः।
सार्जुना वा हते कर्णे सकर्णा वा हतेऽर्जुने॥
तं पुत्रगृद्धिनी भूयो माता पुत्रमथाब्रवीत्।
भ्रातॄणां स्वस्ति कुर्वीथा येषां स्वस्ति चिकीर्षसि॥
एवमुक्त्वा किल पृथा विसृज्योपययौ गृहान्।
सोऽर्जुनेन हतो वीरो भ्रात्रा भ्राता सहोदरः॥
न चैव निःसृतो मन्त्रः पृथायास्तस्य वा मुने।
अथ शूरो महेष्वासः पार्थेनाजौ निपातितः॥
अहं त्वज्ञासिषं पश्चात्स्वसोदर्यं द्विजोत्तम।
पूर्वजं भ्रातरं कर्णं पृथाया वचनात्प्रभो॥
तेन मे दूयते तीव्रं हृदयं भ्रातृघातिनः।
कर्णार्जुनसहायोऽहं जयेयमपि वासवम्॥
सभायां क्लिश्यमानस्य धार्तराष्ट्रैर्दुरात्मभिः।
सहसोत्पतितः क्रोधः कर्णं दृष्ट्वा प्रशाम्यति॥
यदा ह्यस्य गिरो रूक्षाः शृणोमि कटुकोदयाः।
सभायां गदतो द्यूते दुर्योधनहितैषिणः॥
तदा नश्यति मे रोषः पादौ तस्य निरीक्ष्य ह।
कुन्त्या हि सदृशौ पादौ कर्णस्येति मतिर्मम॥
सादृश्यहेतुमन्विच्छन्पृथायास्तस्य चैव ह।
कारणं नाधिगच्छामि कथञ्चिदपि चिन्तयन्॥
कथं नु तस्य सङ्ग्रामे पृथिवी चक्रमग्रसत्।
कथं नु शप्तो भ्राता मे तत्त्वं वक्तुमिहार्हसि॥
श्रोतुमिच्छामि भगवंस्त्वत्तः सर्वं यथातथम्।
भवान्हि सर्वविद्विद्वाँल्लोके वेद कृताकृतम्॥
इति श्रीमन्महाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मपर्वणि प्रथमोऽध्यायः॥ 1॥
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